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अवसंरचना

जल आपूर्ति, स्वच्छता एवं जल निकासी

जल आपूर्ति, स्वच्छता एवं जल निकासी

वाप्‍कोस जल आपूर्ति, स्वच्छता एवं इंजीनियरिंग के क्षेत्र में बहु-विषयक (इंटर-डिसिप्लिनरी) प्रणालीगत दृष्टिकोण के साथ परामर्श सेवाओं का व्यापक दायरा प्रदान करता है।

जल आपूर्ति एवं स्वच्छता

  • मास्टर प्लान तैयार करना
  • जल उपलब्धता अध्ययन
  • स्थलाकृतिक सर्वेक्षण एवं अलाइनमेंट सर्वेक्षण
  • प्रणाली ले-आउट एवं डिजाइन
  • विस्तृत इंजीनियरिंग डिजाइन, ड्रॉइंग एवं लागत अनुमान तैयार करना
  • निविदा दस्तावेज एवं विनिर्देश
  • निर्माण पर्यवेक्षण, कमीशनिंग एवं संचालन-रखरखाव (O&M)
  • तृतीय-पक्ष निरीक्षण
  • अवधारणा से कमीशनिंग तक परियोजना प्रबंधन परामर्श

शोधन (ट्रीटमेंट)

  • परंपरागत एवं गैर-परंपरागत प्रकार के शोधन संयंत्र
  • स्लो सैंड फिल्टर
  • रैपिड सैंड फिल्टर
  • रैपिड ग्रैविटी ड्यूल मीडिया फिल्टर
  • प्रेशर फिल्टर
  • रफनिंग फिल्टर

स्रोत मूल्यांकन एवं विकास

  • सतही/भूजल आकलन
  • जल गुणवत्ता
  • वर्षाजल संचयन
  • जल संरक्षण

अन्य

  • परियोजना समीक्षा एवं मूल्यांकन
  • अप्राप्त/अनलेखित जल में कमी एवं नियंत्रण
  • भुगतान करने की इच्छा सर्वेक्षण
  • प्रशिक्षण एवं संस्थागत विकास
  • जल ऑडिट सर्वेक्षण
  • गैर-राजस्व जल का आकलन

पर्यावरण अभियांत्रिकी

पर्यावरण अभियांत्रिकी

वाप्‍कोस का पर्यावरण केंद्र पर्यावरण के क्षेत्र में बहु-विषयक प्रणालीगत दृष्टिकोण के साथ परामर्श सेवाओं का व्यापक दायरा प्रदान करता है। केंद्र के कोर स्टाफ में पर्यावरण की विभिन्न विधाओं में विशेषज्ञता रखने वाले उच्च योग्य एवं अनुभवी अभियंता और वैज्ञानिक शामिल हैं। पर्यावरणीय अध्ययनों से संबंधित विशिष्ट कार्यों के लिए वाप्‍कोस ग्राहकों की पूर्ण संतुष्टि हेतु विशेषज्ञों की आवश्यकता-आधारित टीम तैनात करता है।

मुख्य परामर्श सेवाएँ

  • पर्यावरण प्रभाव आकलन अध्ययन
  • पर्यावरण प्रबंधन योजनाएँ
  • पर्यावरण ऑडिट
  • स्थल दायित्व आकलन अध्ययन
  • पर्यावरण मॉडलिंग एवं प्रबंधन
  • अपशिष्ट प्रबंधन
  • जलीय पारिस्थितिकी अध्ययन
  • जोखिम आकलन एवं परिणाम विश्लेषण
  • जैव-विविधता एवं वन्यजीव संरक्षण
  • पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अध्ययन
  • सामाजिक-आर्थिक अध्ययन
  • सतत विकास हेतु दिशानिर्देश तैयार करना
  • उपग्रह चित्र प्रसंस्करण एवं आंकड़ों की व्याख्या
  • वायु एवं जल प्रदूषण के कारणों की पहचान एवं सुधारात्मक उपायों की सिफारिश
  • GIS डेटाबेस एवं प्रशिक्षण
  • कैचमेंट एरिया ट्रीटमेंट

पर्यावरण प्रभाव आकलन

  • जल संसाधन
  • औद्योगिक परियोजनाएँ
  • जलविद्युत एवं तापीय विद्युत परियोजनाएँ
  • पत्तन एवं बंदरगाह
  • जलकृषि (एक्वाकल्चर), झील विकास
  • खनन परियोजनाएँ
  • अवसंरचना एवं निर्माण

पत्तन, बंदरगाह एवं अंतर्देशीय जलमार्ग

पत्तन, बंदरगाह एवं अंतर्देशीय जलमार्ग

आर्थिक उदारीकरण के बाद तीव्र आर्थिक वृद्धि से उत्पन्न समुद्री व्यापार में निरंतर वृद्धि ने मौजूदा प्रमुख पत्तनों के उन्नयन तथा नए ग्रीनफील्ड स्थलों के विकास की तात्कालिक आवश्यकता को रेखांकित किया है। निजीकरण पर बढ़ते जोर के साथ अतिरिक्त बर्थ एवं उपकरण, मत्स्य जेट्टी, लोडिंग-अनलोडिंग जेट्टी तथा नए स्थलों के विकास द्वारा मौजूदा पत्तनों के उन्नयन के प्रति जागरूकता बढ़ी है।
भारत की 6400 किमी लंबी समुद्र-तटरेखा है तथा इसके साथ प्रादेशिक जल एवं विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र जुड़े हुए हैं। समुद्री व्यापार का अधिकांश हिस्सा वर्तमान में 13 प्रमुख पत्तनों के माध्यम से संचालित होता है।

भौतिक/गणितीय मॉडल अध्ययन

  • शांत जल स्थितियों का अध्ययन
  • ब्रेकवॉटर की लंबाई का अनुकूलन
  • बंदरगाह लेआउट, जेट्टी एवं बर्थ का संरेखण
  • नेविगेशन चैनल के आयाम एवं अलाइनमेंट का अनुकूलन
  • बर्थ एवं मैनूवरिंग क्षेत्र में जहाज की गतियाँ
  • चैनल, बेसिन एवं बर्थ क्षेत्रों में तलछट जमाव
  • वेव फ्लूम अध्ययन
  • प्रशिक्षण संरचनाएँ एवं अन्य सुरक्षा संरचनाएँ

योजना अध्ययन

  • कार्गो ट्रैफिक विश्लेषण एवं प्रक्षेपण
  • हिंटरलैंड अर्थव्यवस्था एवं मांग
  • परियोजना पहचान एवं मूल्यांकन
  • आर्थिक एवं वित्तीय विश्लेषण
  • निर्माण–स्वामित्व–संचालन–हस्तांतरण (BOOT), निर्माण–स्वामित्व–सेवा–हस्तांतरण (BOST) एवं निर्माण–स्वामित्व–पट्टा–हस्तांतरण (BOLT) पत्तन परियोजनाओं का निवेश विश्लेषण
  • लॉजिस्टिक्स/मटेरियल हैंडलिंग
  • कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल
  • शोर-साइड मटेरियल हैंडलिंग लॉजिस्टिक्स

अन्वेषण/जांच

  • स्थलाकृतिक सर्वेक्षण
  • हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण
  • भूकंपीय सर्वेक्षण
  • भू-तकनीकी (जियोटेक्निकल) जांच
  • महासागरीय/मौसमीय पैरामीटर (जैसे हवा, तरंग, धाराएँ, ज्वार, सिल्ट चार्ज, लवणता आदि) का मापन
  • पूर्वानुमान/हाइंडकास्टिंग तकनीकों से महासागरीय/मौसमीय स्थितियों का आकलन

निर्माण प्रबंधन

  • समय निर्धारण (शेड्यूलिंग)
  • लागत नियंत्रण
  • सामग्री प्रबंधन
  • साइट पर्यवेक्षण
  • PERT/CPM तकनीकों द्वारा निर्माण प्रगति नियंत्रण
  • कर्मियों का प्रशिक्षण

परियोजना प्रतिवेदन (FRs एवं DPRs)

  • परियोजना योजना
  • तकनीकी-आर्थिक व्यवहार्यता
  • लागत अनुमान
  • कार्य के विनिर्देश
  • निविदा इंजीनियरिंग, निविदा विश्लेषण एवं ठेकेदारों का चयन

विस्तृत इंजीनियरिंग

  • विस्तृत डिजाइन
  • निर्माण ड्रॉइंग
  • निर्माण प्रबंधन एवं साइट पर्यवेक्षण

अन्य

  • मत्स्य बंदरगाह
  • ड्रेजिंग एवं रिक्लेमेशन
  • तटीय अभियांत्रिकी
  • पत्तन से संबंधित सुविधाएँ
  • विद्युत एवं यांत्रिक सेवाएँ
  • जोखिम विश्लेषण एवं प्रबंधन
  • SPM एवं SBM अध्ययन
  • जल ग्रहण (इंटेक) प्रणालियाँ (समुद्र एवं नदी)
  • क्षेत्रीय जल निकासी एवं सुरक्षित स्तर निर्धारण

ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र विकास

ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र विकास

ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में निरंतर बढ़ती जनसंख्या जल, विद्युत, आवास, जल निकासी, सतही परिवहन आदि की कमी जैसी विशिष्ट समस्याएँ उत्पन्न करती है तथा इसके परिणामस्वरूप होने वाले प्रदूषण और पर्यावरणीय क्षरण के लिए उपयुक्त समाधान की आवश्यकता होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में अपर्याप्त सुविधाएँ एवं विकास की धीमी गति के कारण ग्रामीण आबादी का शहरी केंद्रों की ओर पलायन होता है, जिससे समस्याएँ और जटिल हो जाती हैं। ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन को नियंत्रित करने हेतु अवसंरचना विकास के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त सुविधाएँ एवं अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है।

ग्रामीण विकास

  • ग्रामीण जलापूर्ति
  • ग्रामीण स्वच्छता
  • ग्रामीण आवास
  • ग्रामीण विद्युतीकरण
  • ग्रामीण भवन
  • ग्रामीण सड़कें
  • बंजर भूमि विकास
  • सूचना, शिक्षा एवं संचार
  • सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण
  • निगरानी, मूल्यांकन एवं प्रभाव आकलन
  • सूक्ष्म जलग्रहण विकास
  • वर्षाजल संचयन
  • भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण
  • मरुस्थल विकास
  • सूखा-प्रवण क्षेत्र विकास
  • राजस्व प्रशासन को सुदृढ़ करना एवं अभिलेखों का अद्यतन
  • जल गुणवत्ता निगरानी

शहरी विकास

  • शहर विकास योजना/मास्टर प्लान
  • बायोमेट्रिक सर्वेक्षण
  • शहरी गरीबों के लिए आवास
  • जलापूर्ति एवं स्वच्छता
  • तूफानी जल निकासी
  • ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
  • शहरी नवीनीकरण
  • वायु प्रदूषण एवं जल प्रदूषण
  • सीवरेज
  • जल गुणवत्ता
  • झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास
  • विरासत/पर्यटन विकास
  • सड़क प्रकाश व्यवस्था
  • जल निकाय

सड़क एवं राजमार्ग अभियांत्रिकी

सड़क एवं राजमार्ग अभियांत्रिकी

वाप्‍कोस ने विशेष रूप से सड़क एवं राजमार्ग अभियांत्रिकी के अंतर्गत अवसंरचना सुविधाओं के विकास हेतु परामर्श सेवाओं में विविधता लाई है। कंपनी ने विभिन्न प्रकार की मिट्टी एवं भू-आकृतियों में परियोजनाओं के लिए सेवा मार्गों के सर्वेक्षण एवं जांच, योजना, डिजाइन तथा निर्माण पर्यवेक्षण जैसे कार्य किए हैं; इसमें ग्रामीण सड़कें, राजमार्ग तथा संबंधित संरचनाएँ—जैसे क्रॉस ड्रेनेज वर्क्स, कलवर्ट और पुल—शामिल हैं। यह यातायात सर्वेक्षण, विस्तृत इंजीनियरिंग, पुनर्रचना, अनुबंध प्रबंधन, निविदा दस्तावेज एवं तकनीकी विनिर्देश, तथा सड़क एवं पुलों का रखरखाव एवं मरम्मत कार्य भी करता है। वाप्‍कोस ने भारत सहित भूटान, इंडोनेशिया आदि अन्य विकासशील देशों में ग्रामीण एवं शहरी सड़कों और राजमार्गों के लिए परामर्श सेवाएँ प्रदान की हैं।

सड़क अभियांत्रिकी

  • स्थलाकृतिक सर्वेक्षण
  • अलाइनमेंट सर्वेक्षण
  • यातायात सर्वेक्षण
  • यातायात अभियांत्रिकी
  • सड़कों एवं राजमार्गों का डिजाइन
  • तकनीकी विनिर्देश
  • निविदा दस्तावेज
  • निर्माण पर्यवेक्षण
  • रखरखाव एवं मरम्मत
  • जल निकासी उपाय
  • प्लांट, उपकरण एवं मशीनरी
  • सड़क विफलताओं एवं सुधारात्मक उपाय
  • निर्माण सामग्री सर्वेक्षण
  • परिवहन अर्थशास्त्र

पुल अभियांत्रिकी

  • पुल एवं कलवर्ट
  • रेलवे ओवरब्रिज
  • क्रॉस ड्रेनेज वर्क्स
  • मृदा जांच
  • लोड टेस्ट
  • फाउंडेशन का डिजाइन
    • पाइल्स
    • कुएँ
  • सुपरस्ट्रक्चर का डिजाइन
    • पियर
    • एबटमेंट
    • डेक

मुख्य परामर्श

  • रेलवे सुरंगों के लिए डिजाइन परामर्श

प्रणाली अध्ययन एवं सूचना प्रौद्योगिकी

प्रणाली अध्ययन एवं सूचना प्रौद्योगिकी

वाप्‍कोस सूचना प्रौद्योगिकी के नवीनतम विकास के साथ कदम मिलाकर चलता है और सॉफ्टवेयर विकास से संबंधित परामर्श कार्य—जैसे प्रबंधन सूचना प्रणाली का विकास, भौगोलिक सूचना प्रणाली आदि—अंजाम देता है। जल संसाधन क्षेत्र में भी वाप्‍कोस सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े कार्य करता है, जैसे जलाशय अनुकरण एवं संचालन मॉडल, कंप्यूटर आधारित निगरानी एवं मूल्यांकन, डैम-ब्रेक मॉडलिंग, परियोजना प्रबंधन आदि; इसके अतिरिक्त बहु-विषयक क्षेत्रों में ग्राहक-उन्मुख विशेष अध्ययन भी किए जाते हैं।

भौगोलिक सूचना प्रणाली / रिमोट सेंसिंग

  • कॉन्टूरिंग
  • एल-सेक्शन
  • संरचनात्मक डिजाइन
  • संसाधन मानचित्रण
  • उपग्रह चित्रों के बहुउपयोग हेतु विशेषताओं का मानचित्रण
  • GIS सॉफ्टवेयर का कस्टमाइज़ेशन
  • कंपनी परिचालनों का कंप्यूटरीकरण
  • भूमि उपयोग एवं भूमि आवरण मानचित्रण
  • डिजिटल एलिवेशन मॉडल का निर्माण
  • कर्मियों का प्रशिक्षण

प्रबंधन सूचना प्रणाली

  • कस्टम डिजाइनिंग
  • परियोजना निगरानी
  • वित्तीय निगरानी
  • कार्मिक सूचना प्रबंधन

बहुउद्देशीय-बहुजलाशय प्रणाली अध्ययन

  • सिमुलेशन
  • जलाशय संचालन
  • निर्णय समर्थन प्रणालियाँ

अतिरिक्त परामर्श

  • विभिन्न विकास परियोजनाओं के प्रभाव की निगरानी एवं मूल्यांकन
  • हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग
  • वर्षा-रनऑफ मॉडलिंग
  • तलछट अध्ययन
  • बाढ़ पूर्वानुमान
  • डैम-ब्रेक मॉडलिंग
  • जल संतुलन अध्ययन
  • लवण संतुलन अध्ययन
  • कंप्यूटर सहायता प्राप्त डिजाइन एवं ड्राफ्टिंग
  • शहरी तूफानी जल निकासी प्रणालियों का डिजाइन
  • सॉफ्टवेयर आधारित CPM/PERT तकनीकों द्वारा परियोजना प्रबंधन
  • प्रौद्योगिकी उन्नयन एवं प्रशिक्षण
  • क्षमता निर्माण
  • कस्टमाइज़्ड सॉफ्टवेयर विकास
  • वित्तीय निगरानी
  • विश्व बैंक परियोजनाओं हेतु ऋण प्रशासन परिवर्तन पहल

सॉफ्टवेयर विकास

  • फसल जल आवश्यकता
  • गेट संचालन
  • भूजल मॉडलिंग
  • जलाशयों के भराव (फिलिंग) का शेड्यूल
  • जोखिम मूल्यांकन

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